यूँ ही उदास है दिल बेक़रार थोड़ी है
मुझे किसी का कोई इंतिज़ार थोड़ी है
नज़र मिला के भी तुम से गिला करूँ कैसे
तुम्हारे दिल पे मेरा इख़्तियार थोड़ी है
मुझे भी नींद न आए उसे भी चैन न हो
हमारे बीच भला इतना प्यार थोड़ी है
मुहब्बतों में सभी हक़ अदा किए हमने
हमारे सर पे किसी का उधार थोड़ी है
ख़िज़ाँ ही ढूँढती रहती है दर-ब-दर मुझ को
मेरी तलाश में पागल बहार थोड़ी है
न जाने कौन यहाँ साँप बन के डस जाए
यहाँ किसी का कोई एतिबार थोड़ी है
समझ सकोगे न 'परवाज़' तुम मुहब्बत को
ये आशिकी है कोई कारोबार थोड़ी है
-जतिन्दर परवाज़
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