शिद्दतों में जो बे' शुमार रहा
मेरी आंखों का इंतिज़ार रहा
भूल हमको कभी नहीं सकता
दिल में बाक़ी ये ए'तबार रहा
पूछ कर ज़िंदगी बता देना
हम पर किसका कहां उधार रहा
मेरा कब मुझ पे इख़्तियार रहा
दिल तो दिल था सो बें' क़रार रहा
बे' बसी ज़िंदगी में थी शामिल
मेरा दामन भी तार-तार रहा
- फौज़िया नसीम शाद