विज्ञापन

किसी भी

Dr fouzia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसी भी ग़म की
        
                                                    
                            
न कभी तेरे हिस्से में
कोई शाम आये
मुस्कुराता हुआ
तेरे हिस्से में,
तेरा हर एक पल आये
तमाम ख़ुशियाँ
जहाँ की
तेरा मुकद्दर हो
मेरे लबों की दुआ का
बस तू ही मरकज़ हो ।
-फौज़िया नसीम शाद
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3562 कविताएं

View Profile