किसी भी ग़म की
न कभी तेरे हिस्से में
कोई शाम आये
मुस्कुराता हुआ
तेरे हिस्से में,
तेरा हर एक पल आये
तमाम ख़ुशियाँ
जहाँ की
तेरा मुकद्दर हो
मेरे लबों की दुआ का
बस तू ही मरकज़ हो ।
-फौज़िया नसीम शाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X