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ख़्वाहिशों का भी दम निकलता है

Dr fouzia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजनबी जैसा हम से मिलता है
        
                                                    
                            
दर्द आँखों से तब पिधलता है

जान जाती है उस के जाने से
ख़्वाहिशों का भी दम निकलता है

टूटता है यकीन खुद पर से
कोई मौसम सा जब बदलता है

कैसे पहुंचेगा एक मंजिल पर
रास्ते बारहा बदलता है

कोशिशों पर यक़ीं करो अपनी
मुश्किलों का भी हल निकलता है
-फौज़िया नसीम शाद
2 महीने पहले
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