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ख़्वाहिशों का भी दम निकलता है

                
                                                         
                            अजनबी जैसा हम से मिलता है
                                                                 
                            
दर्द आँखों से तब पिधलता है

जान जाती है उस के जाने से
ख़्वाहिशों का भी दम निकलता है

टूटता है यकीन खुद पर से
कोई मौसम सा जब बदलता है

कैसे पहुंचेगा एक मंजिल पर
रास्ते बारहा बदलता है

कोशिशों पर यक़ीं करो अपनी
मुश्किलों का भी हल निकलता है
-फौज़िया नसीम शाद
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2 महीने पहले

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