तेरी निगाहों में मैं अपने गुनाह, उनके निशान खोजता हूं सनम,
ऐसी भी क्या बात है कि तुम बात तक नहीं करती,
मैं इतना भी नहीं हूं बुरा जितना सोचती हो तुम,