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जन्नत की चाहत

Dn Chaubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम को देख
        
                                                    
                            
सोचा अगर दिलरूबा तुम बन जाओ तो मैं संवर जाऊं,
अगर मैं संवर जाऊं फिर की परवाह क्यों करूं,
अगर मिल जाएं जगह दिल में तुम्हारे, फिर जन्नत की चाहत मैं क्यों करूं,
एक दिन पहले
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