विज्ञापन

आंखें थक जाती है

Dn Chaubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुबह से शाम तक तेरी राह देखते देखते मेरी आंखें थक जाती है,
        
                                                    
                            
और एक आप हो जनाब,ना जाने कहां रहती हो,
यह तो मेरे दिल, कसमें, वादों, रिश्ते, दिल की मजबूरी है सनम,
वरना मैं कब का अपनी मंजिल बदल दिया होता,
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all