सुबह से शाम तक तेरी राह देखते देखते मेरी आंखें थक जाती है,
और एक आप हो जनाब,ना जाने कहां रहती हो,
यह तो मेरे दिल, कसमें, वादों, रिश्ते, दिल की मजबूरी है सनम,
वरना मैं कब का अपनी मंजिल बदल दिया होता,
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