बन सको तो मेरे अल्फ़ाज़ बन जाओ,
जो पूरे नहीं हो सके वो ख़्वाब बन जाओ।
मेरी ख़ामोशियों को भी पढ़ सको अगर,
मेरे दिल की धड़कनों का राज़ बन जाओ।
जो राहें मुझसे होकर तुम तक जाती हैं,
उन राहों का कोई आग़ाज़ बन जाओ।
मैं लिखूँ तुम्हें तो स्याही महक उठे,
मेरी हर ग़ज़ल का अंदाज़ बन जाओ।
दूर रहकर भी जो पास होने का एहसास दे,
मेरी तन्हाई में वो आवाज़ बन जाओ।
माँगूँ न तुम्हें किसी दुआ में कभी,
बस मेरी हर दुआ का जवाब बन जाओ।
और जब ये दुनिया हमें भूलने लगे,
तुम मेरी यादों का एक ख़्वाब बन जाओ।