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सिर्फ तेरी चाह में

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम नदी की बाढ़ बन फैलो हमारी बांह में
        
                                                    
                            
घाट बन दोनों किनारे होंठ सिमटे आह में.
साँस सारी सिमट जायें बनके पुरवाई पवन
बिजलियाँ चमके गगन में सिर्फ तेरी चाह में .
-दिनेश चौहान
एक महीने पहले
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