विज्ञापन

रास रचाती हैं

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ बूंदे गालों पर गिर कर मोती जब बन जाती हैं
        
                                                    
                            
चाँद की किरणें पत्तों के झुरमुट से छनकर आती हैं
बन चकोर यायावर मन एकटक नभ को देखे जब
तारावलियाँ बन गोपियां कान्हा संग रास रचाती हैं.
-दिनेश चौहान
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Pradeep Kairana

2 कविताएं

View Profile

Kunwar Sarvendra

167 कविताएं

View Profile