कुछ बूंदे गालों पर गिर कर मोती जब बन जाती हैं
चाँद की किरणें पत्तों के झुरमुट से छनकर आती हैं
बन चकोर यायावर मन एकटक नभ को देखे जब
तारावलियाँ बन गोपियां कान्हा संग रास रचाती हैं.
-दिनेश चौहान
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