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परिजन जिनके हैं नहीं

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खटिया मचिया लाद के जा पहुंचेगे घाट
        
                                                    
                            
परिजन जिनके हैं नहीं , ना जोहेगे बाट .

चाभी जिनको सौंप दी वे सब निकले चोर
अब पछताये कुछ नहीं कैसी रात या भोर.

न्याय तराजू हाथ रख,अन्यायी के लोग
चाहत सुख की लिये,दुःख रहे सब भोग.

सिंह समझ के सियार को सत्ता दे दी जब
मुख अपना तब खोलना पांच साल हो जब.

जनता सारी भेंड़ सी बढ़ती है हर ओर.
कूदी जब भी कूप में मिलता नहीं कोई छोर.
-दिनेश चौहान
2 महीने पहले
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