खटिया मचिया लाद के जा पहुंचेगे घाट
परिजन जिनके हैं नहीं , ना जोहेगे बाट .
चाभी जिनको सौंप दी वे सब निकले चोर
अब पछताये कुछ नहीं कैसी रात या भोर.
न्याय तराजू हाथ रख,अन्यायी के लोग
चाहत सुख की लिये,दुःख रहे सब भोग.
सिंह समझ के सियार को सत्ता दे दी जब
मुख अपना तब खोलना पांच साल हो जब.
जनता सारी भेंड़ सी बढ़ती है हर ओर.
कूदी जब भी कूप में मिलता नहीं कोई छोर.
-दिनेश चौहान
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