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मुकाम था नहीं उसका

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रेल सी निकल गई तेज बहुत
        
                                                    
                            
पटरियों सा थरथराता रह गया
मुकाम था नहीं उसका कभी
खड़ा देखता बस वो रह गया.
-दिनेश चौहान
एक महीने पहले
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