विज्ञापन

मंदिर का चंदा चुरा रहा था

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रावण का घर पूरा खूब जगमगा रहा था
        
                                                    
                            
बिल बिजली का राम को सता रहा था
आदर्शो की आड़ लेकर राम बैठे रह गये
और रावण मंदिर का चंदा चुरा रहा था.
-दिनेश चौहान
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajan

30 कविताएं

View Profile