खुद की नाकामियों पर रोना जिसे आता है
दूसरों के गिरने पर वही तमाशा कर जाता है
सारी जिन्दगी बिता देता दूसरों को देखने में
दस्तूर दुनिया का समझ में तब उसे आता है .
-दिनेश चौहान