विज्ञापन

जब पताका ये सनातन धरा में झुकने लगे

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब ऋचाएं वेद की कान को चुभने लगे
        
                                                    
                            
स्वर ये शहनाई के अपने राग से हटने लगे
और पताका ये सनातन धरा में झुकने लगे
समझ लेना पतन के दिन अब हमारे आ गये.
-दिनेश चौहान
16 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10484 कविताएं

View Profile