जब ऋचाएं वेद की कान को चुभने लगे
स्वर ये शहनाई के अपने राग से हटने लगे
और पताका ये सनातन धरा में झुकने लगे
समझ लेना पतन के दिन अब हमारे आ गये.
-दिनेश चौहान