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होंठ हँसते ही रहे

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुशियाँ हजार मिलीं
        
                                                    
                            
ग़म की हरदम चली.

कभी खुशी कभी ग़म
जिंदगी रही ये बेदम .

होंठ हँसते ही रहे
ग़मों को पीते रहे .

जुबां कैंची सी चली
बात रिश्तों की टली.

चादर प्रेम की ओढ़ी
निभाई दुश्मनी ड्योढी.

दिनेश चौहान
9 घंटे पहले
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