विज्ञापन

हाथ कुछ नहीं आता है ?

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर आदमी खुद से ही लड़ता है
        
                                                    
                            
कुरुक्षेत्र के मैदान पर
अपने ही सामने खड़ा होता है
खुद का दुश्मन बन कर
कभी जीत जाता है
तो कभी हार जाता है
हारना निराशा को जन्म देती
जीतना गर्व और खुशी देती
बीत जाता है युद्ध में जीवन
अर्जुन भी और वही दुर्योधन
कृष्ण सब जानता है.
परिणाम पहले नहीं बताता है.
जीवन बीत जाता है
हाथ कुछ नहीं आता है.
-दिनेश चौहान
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all