हर आदमी खुद से ही लड़ता है
कुरुक्षेत्र के मैदान पर
अपने ही सामने खड़ा होता है
खुद का दुश्मन बन कर
कभी जीत जाता है
तो कभी हार जाता है
हारना निराशा को जन्म देती
जीतना गर्व और खुशी देती
बीत जाता है युद्ध में जीवन
अर्जुन भी और वही दुर्योधन
कृष्ण सब जानता है.
परिणाम पहले नहीं बताता है.
जीवन बीत जाता है
हाथ कुछ नहीं आता है.
-दिनेश चौहान