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डूबते चाँद कहाँ जाओगे

dinesh chauhan

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                            बिछुड़ कर कहाँ जाओगे
        
                                                    
                            
लौटकर तो यहाँ आओगे.

रास्ते के पत्थर की तरह
ठोकरें जमाने की खाओगे.

लोग छेड़ेगे ये किस्से हमारे
जबाब किस को दे पाओगे.

उड़ कर चिरैया सा गगन में
बाज से कब तक बच पाओगे.

तड़पती मछली सा चेहरा
छिपा कर कहाँ जाओगे .

लौट कर अंत में यहाँ आओगे
डूबते चाँद फिर कहाँ जाओगे.
-दिनेश चौहान
23 घंटे पहले
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