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आज फिर से मिल गये

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बालपन के कुछ घरौंदे संग संग बनाये
        
                                                    
                            
साथ खेले तोड़ कर फिर सब चल दिये

गांव की पगडंडियों पर खूब दौड़े आगे पीछे
कदम जिनके तेज थे, शहर को निकल गये.

घर बनाये फिर सजाये परिजनों को साथ ले
सब विलासी हो गये और वे कंगूरे चढ़ गये.

कुछ शिखर पर बैठकर हमको चिढ़ाते ही रहे
और मालाएँ पहन कुछ जलवा दिखाते रह गये.

आज जीवन के सफ़र में रास्ते सब लौट आये
चार कंधों पर लदे संग छोड़कर सब चल दिये.

बालपन के सब घरौंदे आज फिर से मिल गये
साथ खेले तोड़कर जिनको कभी थे चल दिये.

- दिनेश चौहान
2 महीने पहले
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