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जुल्मों सितम

Dilshad Ahmad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गर्दिश-ए-लहू दिल को जलाने लगी है।
        
                                                    
                            
आगोश-ए-सितम हर जगह छाने लगी है।
कोई बेदार कर दे उम्मते मुस्लिमा को।
बेइंतहा जुल्मों सितम अब होने लगी है।

- शाद अहमद शाद गयावी
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4 वर्ष पहले
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