गर्दिश-ए-लहू दिल को जलाने लगी है।
आगोश-ए-सितम हर जगह छाने लगी है।
कोई बेदार कर दे उम्मते मुस्लिमा को।
बेइंतहा जुल्मों सितम अब होने लगी है।
- शाद अहमद शाद गयावी
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