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जल से ही जीवन का उज्ज्वल कल है।।

Dhirendra Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जल ही जीवन
        
                                                    
                            

कीचड़ का कारण जल है,
कीचड़ का निवारण जल है।
जल ही जीवन, जल ही कल है,
जल बिना मानव विकल है।।

जल है तो होती कल-कल है,
जल बिन सूना पड़ा जो नल है।
जल नहीं तो बड़ी मुश्किल है,
जल बिन जीवन भी मुश्किल है।।

जल बिन सोचूँ, जल बिन जानूँ,
जल का महत्त्व सदा मैं मानूँ।
जल से चले, जल तक चलें,
सफल हो जो अच्छी पहल है।।

जल बिन नहीं कुछ भी होता यहाँ,
जल बिन नहीं बनता महल है।
फर्श से अर्श तक जो सफल है,
मार्गदर्शक जरूर ही जल है।।

जल ही तो है जो ज़लज़ला लाए,
जल से चले समीर चंचल है।
जल से आग बुझे, हो हृदय सुकोमल,
जल बिन कीचड़ में नहीं खिले कमल है।।

कुछ भी करो, जल-संचय करो,
बहुत समस्या का निवारण जल है।
हो आईना गंदा, जल करे सफाई,
जल बिन नहीं बनता दलदल है।।

जल बिन किसान, मजदूर तड़पे,
जल बिन सूख जाए सारा थल है।
जल को बचाओ, जल को सहेजो,
जल से ही जीवन का उज्ज्वल कल है।।

 
एक महीने पहले
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