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राजा रतन सिंह रानी पद्मावती की वीरगाथा

Dharmendra Tripathi

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                            राजा रतन सिंह बोल रहे
        
                                                    
                            
सुनो रानी पद्मावती
सुनने सुनाने का समय नहीं
बाहर दुश्मन की सेना खड़ी
राजपूतों से लड़ने पे है अड़ी।
राजा रतन सिंह गुस्से में बोल रहे
राजपूती है अपनी शान
मिटने न दूँगा इसका मान
जब तक साँसे चलती रहेंगी
खींच लूँगा दुश्मन के प्रान।
राजा रतन सिंह युद्ध की तैयारी में
मुकुट पहनावो तिलक लगावो
सुनो सेना खड्ग उठावो
राजा रतन सिंह युद्ध के क्षेत्र में
वीरों सा मै लड़ता गया
पर काटा और गर्दन उड़ाता गया
जब तक साँसें चलती रही
जमीर उनका लड़खड़ाता गया।
राजा रतन सिंह के वीरगति प्राप्त होने के बाद
रानी पद्मावती बोल रही
राजा ने पाया वीरगति
जीवन भी होगा अपना सती
दाग नही लगने दूँगी
फिर जाए भले मेरी मति।
रानी पद्मावती का अदम्य साहस
वीरांगना भला किससे डरेगी
ज्वाला मे ही जौहर करेगी
ये है भारत की सच्ची कथा
जिसमे छिपी है वीरगाथा।

धर्मेंद्र त्रिपाठी
खरीद, चंदौली (उ०प्र०)
3 वर्ष पहले
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