सपनों में ईश्वर अल्लाह गॉड, कंधों में कंधा मिलाकर खड़े मिले,
और हाथ एक डायरी लिए मिले,
मैंने चौक कर देखा, समझ नहीं आया क्या कहूं,
जय श्री राम बोलूं, या अल्लाह हू अकबर
या अंग्रेजी में ओ माय गॉड बोलूं,
वह मुझे अबोध बालक समझ कर देखें
और मुझ पर जोर जोर से हंसे,
वो कहे, हम लोग अपने डायरी से कुछ बात को बोलेंगे,
उसे अपना जाना और अपने प्रिय साथियों को बता देना|
" हे मानव तू तो खिलाड़ी निकला रे!
और मैं तुझे इंसान बना कर भेजा, था
तू तो हैवान निकला रे,
कभी दलित, कभी ब्राम्हण कभी सिख ,कभी मुसलमान
आदिआदि समुदायों में पाया रे!
हे मानव तू तो खिलाड़ी निकला रे!
ब्राह्मणों के लिए दलित को, दलित के लिए ब्राह्मणों को,
हिंदुओं के लिए मुसलमानों को, मुसलमानों के लिए हिंदुओं को, खड़े नहीं पाया रे
हे मानव तू तो खिलाड़ी निकला रे!
क्या मिलता है तुम्हें ऐसे संप्रदायवाद बढ़ाकर,
मासूम स्त्रियों को खिलौना बना कर,
उनके मैं भी इमोशन और प्यार होता है,
जो सृष्टि निर्माण करने का आधार होता है,
तुम्हारे ये कट्टरपंथ ही विचारधारा से,
उनको
जीने का एहसास नहीं होता है,
हे मानव! अपने समुदाय के साथ दूसरे समुदाय को गले लगाकर देखो,
उनके सुख-दुख में हाथ बढ़ाकर देखो
अपने अंदर समानता बंधुत्व और संतोषजनक सुख पाओगे
हर जगह, हर गली, हर मोहल्ले! बस प्यार ही प्यार का साम्राज्य स्थापित कर पाओगे!
एक बात ध्यान से सुनना मेरा, इतिहास जीवन जीने का तरीका बताती है,
ना कि कट्टरपंथियों विचारधारा को बढ़ाती है!
इतिहास पढ़ना जीवन बदलने के लिए,
और विज्ञान पढ़ना जीवन जीने के लिए,
हे मानव ! अब हैवान नहीं इंसान बना रहे,
तुम मुझे जहां भी मांनते हो , मैं वहां से देखूं
तू मुझे मेरे निर्माण पर गौरवानंतरित महसूस कराना रे!
हे मानव ! अब हैवान नहीं इंसान बना रहे,....
- धर्मदीप