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इश्क में तनिक इन्तजार कर लूं

Devendra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गज़ल
        
                                                    
                            

इश्क में तनिक इन्तज़ार कर लूं
तन्हाइयों से थोड़ा आंखें चार कर लूं

चाह तो है कि ख़िल्वत में गुफ्तगू होवे
पहले तो खुद को बेकरार कर लूं

दिल धड़कता है नाम उसका आने पर
दिल की चिंगारी को अंगार कर लूं

बेमिसाल प्यार में कुछ लोग जो हुए
ख़ुदसताई मैं भी कई बार कर लूं

फ़ुर्क़त होने न दुगां , ये मेरा वादा है
पहले तो उसका आज दीदार कर लूंं 

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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