जय पंच देव दयाला, जय भगवती माता।
आरती उतारें तेरी, तुम जीवन कर्ता ॥
ॐ जय पंच देव, प्रभु जय पंच देव ॥
अग्र पूजित गुरु बरम देव, शांत रूप ध्यावे,
सबका लेखा-जोखा रखते, गुरुदेव कहावे।
ऐड़ी राजा सेनापति हैं, आगे दौड़ लगाते,
खुले जगह मंदिर इनके, वायु वेग से आते ॥
ॐ जय पंच देव... ॥
दायें भुजा बावन वीरों, की सेना चलती,
निरमांसाहारी भूमियां, जोत जहाँ जलती।
काला लिंग दुधाधारी, स्वामी पूजे जाते,
गाजा लाल बना कर, सब रोग भगाते ॥
ॐ जय पंच देव... ॥
बायीं भुजा सिद्धों की, सेना साथ चलती,
गुरु गोरखनाथ प्रमुख, महिमा नित पलती।
चिमटा शस्त्र हाथ सोहे, विभूति के ध्यानी,
सिद्धों के यश गाते, सब जोगी ज्ञानी ॥
ॐ जय पंच देव... ॥
माँ भगवती रहती छत्र रूप, चार देव बहिन मानते,
इसीलिए माँ की पूजा, परिक्रमा करते।
चार देवता चार खंभ बन, शीश छत्र धरते,
शक्ति बिना जग सूना, सच्चा न्याय करते ॥
ॐ जय पंच देव... ॥
असली गुरु अग्नि है, जो परीक्षा लेती,
शिव-शक्ति समाहित, पाप शून्य कर देती।
आधी धूनी सात्विक, आधी तामसिक माया,
यज्ञ हवन से जग में, सबने यश गाया ॥
ॐ जय पंच देव... ॥
गुरु बरम देव आदेशें, ऐड़ी बाण चलाते,
दशों दिशाओं में सेना जाती, ढोल जब दास बजाते।
भागें भूत और प्रेत, संकट सब टल जाते,
सेनापति के संग भक्त, रक्षा सुख पाते ॥
ॐ जय पंच देव... ॥
पहले देवता और गण, पूजे सब जाते,
अंत में सेनापति, पूजा हक पाते।
तभी तो सेनापति आगे, मार्ग बनाते हैं,
अंत में उनकी पूजा, सब विधि अपनाते हैं ॥
ॐ जय पंच देव... ॥
फूलों की माला भगवती, ऐड़ी गले सोहे,
पंच देवता बैठ जब, भक्त मन मोहें।
दूध और पानी जैसे, न्याय अलग करते,
सत्य सनातन की जय, सब भक्त हैं करते ॥
ॐ जय पंच देव... ॥
निर्धनों को धन देते, निसंतान को संतान,
मनसा वाचा पूर्ण कर, करते सबका कल्याण।
जैसा कर्म करोगे, वैसा फल है पाते,
सत्य सनातन के रंग, सब भक्त हैं रंग जाते ॥
ॐ जय पंच देव... ॥
पंच तत्व पंच शक्तियाँ, मुखी हनुमान जैसे,
पंच देव आराध्य हमारे, पूजे जाते वैसे।
गोलू देव पंच देवों को, मामा हैं कहते,
इसीलिए बाला गोरिया, रूप में हैं रहते ॥
ॐ जय पंच देव... ॥
ब्यानधुरा धाम पखान, गहतोड़ा चौघान,
फटकशिला नलिया लधौन, गाते गुणगान।
दिक्टी छड़ौज बरसी गाजा, कुटौली धाम विराजे,
पंच देव की लीला से, तीनों लोक हैं साजे ॥
ॐ जय पंच देव, प्रभु जय पंच देव ॥
- देवकी नन्दन