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इंसान हूँ मैं और तू भी

dev sachdeva

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलो नफ़रत को मिटाया जाए,
        
                                                    
                            
अम्नो-अमान फिर लाया जाए।

एक हैं हम कोई रंजिश नहीं है,
सारी दुनिया को दिखाया जाए।

मसाइल दरमियाँ बेमानी हैं,
उन्हें हर दिल से भुलाया जाए।

जियें हम औरों को भी जीने दें,
ऐसा माहौल बनाया जाए।

ईद का दिन हो या हो दीवाली,
साथ मिलजुल के मनाया जाए।

फूल हर रंग के खिलते हों जहाँ,
चमन शादाब साजाया जाए।

"शमीम" इंसान हूँ मैं और तू भी,
बस यही जज़्बा जगाया जाए।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
10 घंटे पहले
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