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दिलकश अंदाज़

dev sachdeva

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत दिलकश है तेरा अंदाज़ मुस्कुराने का,
        
                                                    
                            
लुट गया दिल तेरी अदाओं पर दीवाने का।

मदभरी नज़रों से हम को वो नशा होता है,
पीते हैं तो भुला दिया है रास्ता मैख़ाने का।

तुमको पाकर हमें मिली मंज़िल-ए-मक़सूद,
और सबब मिल गया हम को जिए जाने का।

मेरे अशआर और ग़ज़लों तू ही तो शामिल है,
ज़िक्र करते हैं हर महफ़िल में तेरे फ़साने का।

इश्क़ो-मोहब्बत जहाँ में जुर्म समझा जाता है,
हमें ख़बर है कि यही तो दस्तूर है ज़माने का।

बज़्म तेरे लिए हम ने सजा रक्खी है "शमीम",
कब से इंतज़ार कर रहे हैं हम तेरे आने का।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
17 घंटे पहले
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