विज्ञापन

आशुफ़्ता-सरी

dev sachdeva

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुझ को पाकर हासिल जैसे हर ख़ुशी कर ली,
        
                                                    
                            
दिये उम्मीदों के जलाए और रौशनी कर ली।

ख़यालों में सजाकर तुझ को जो लिखा हम ने,
लोग ये कहने लगे कि हम ने शायरी कर ली।

आँखों आँखों में जो कुछ हम से तू ने कहा,
इशारों में ही अपने दिल की बात भी कर ली।

तेरे ख़यालों में हर वक़्त रहते हैं बेख़ुद हम,
जब से मोहब्बत हुई आशुफ़्ता-सरी कर ली।

ख़फ़ा न होना तुम हम को मुआफ़ कर देना,
शरारत हम ने अगर जान-ए-जाँ कभी कर ली।

तेरे सिवा तो हमें और कुछ न चाहिए "शमीम",
तेरी उल्फ़त मिली हासिल-ए-ज़िंदगी कर ली।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all