तोहरे नयना कजरारे, मोरे मनवा कइ चोरी करै,
एक झलक तोहार देखि कै, जियरा बहुतै बेचैन करै।
तोहार हँसी जब बाजै, जैसे पायल छनकै अंगना में,
तोहार चुनरिया जब उड़ै, लागै फागुन लागा अँगना में।
गंगा-जमुना से कारी तोहरी चोटी लहरावै,
गुलाबो से कोमल तोहरे गाल, देखि कै जियरा ललचावै।
तू जब पास आवै, बयार भी धीरे बहै,
तू जब मुस्कावै, सगरी बगिया महकै।
ऐ सजनी, मोरे सजनी,
तोहसे बंधा है मोरे करम कइ डोर,
तू ना हो तो लागै सूना,
तोहरे बिना लागै नाही भोर।