"रिश्तों की पूँजी"
बैंक में नोट गिनने वाले बहुत मिलेंगे,
पर मन की बात सुनने वाला
समाज में ही मिलेगा।
ऑफिस में सफलता तुम्हारी डिग्री तय करेगी,
पर समाज में तुम्हारा मूल्य
तुम्हारा व्यवहार तय करेगा।
जब तुम सबके सुख में खड़े होगे,
तब तुम्हारे दुःख में पूरी भीड़ खड़ी होगी,
यही तो सामाजिक जीवन का ब्याज है,
जो वक्त पर सबसे बड़ा साथ बन जाता है।
छोटा सा मंत्र याद रखो -
कम बोलो, सबकी सुनो,
अपना काम करो, सबके काम आओ,
नाम खुद-ब-खुद बन जाएगा,
बस इंसानियत का दिया जलाए जाओ।