आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

रिश्तों की पूँजी"

                
                                                         
                            "रिश्तों की पूँजी"
                                                                 
                            

बैंक में नोट गिनने वाले बहुत मिलेंगे,
पर मन की बात सुनने वाला
समाज में ही मिलेगा।

ऑफिस में सफलता तुम्हारी डिग्री तय करेगी,
पर समाज में तुम्हारा मूल्य
तुम्हारा व्यवहार तय करेगा।

जब तुम सबके सुख में खड़े होगे,
तब तुम्हारे दुःख में पूरी भीड़ खड़ी होगी,
यही तो सामाजिक जीवन का ब्याज है,
जो वक्त पर सबसे बड़ा साथ बन जाता है।

छोटा सा मंत्र याद रखो -

कम बोलो, सबकी सुनो,
अपना काम करो, सबके काम आओ,
नाम खुद-ब-खुद बन जाएगा,
बस इंसानियत का दिया जलाए जाओ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर