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भूख से लड़ता इंसान

Dev Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भूख से लड़ता इंसान
        
                                                    
                            

वो सुबह नहीं देखता, शाम नहीं देखता,
पेट की आग में वो आराम नहीं देखता।
फटे हैं कपड़े, छाले हैं पाँव में,
फिर भी हौसला जिंदा है उसकी आँख में।

रोटी के लिए वो रोज़ लड़ता है,
गिरता है, उठता है, फिर चलता है।
दुनिया कहती है - किस्मत का मारा है,
पर वो खुद अपनी किस्मत को गढ़ता है।

न छत है पूरी, न बिस्तर है पास,
फिर भी दिल में उम्मीद की है आस।
भूख ने सिखाया है उसे जीना,
आँसुओं में भी हंस के पीना।

मत तरस खा, उसे कमजोर न समझ,
वो भूख से लड़ता, सबसे बड़ा योद्धा है।
जिसने भूख को भी झुका दिया,
वो इंसान नहीं, हौसले का पहाड़ है।

वो आज भूखा है, कल बादशाह होगा,
उसकी मेहनत का ही तो राज होगा।
क्योंकि जिसने भूख से लड़ना सीख लिया,
उसने इस दुनिया में जीना सीख लिया।
2 महीने पहले
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