"गुज़ारिश" नहीं की उसे मनाने की,
शिकायत भी न की उसके दूर जाने की।
ज़ोर लगाया था उसने हाथ छुड़ाने का,
रोक न सकी तो मैंने छोड़ दिया।
मिन्नतों का अब कोई सवाल नहीं,
उम्मीदों का दामन मैंने भी छोड़ दिया।
न शिकायत की उसके दूर जाने की,
न 'गुजारिश" ही की उसे फिर बुलाने की।।