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ख्वाब की कीमत

DEEPAK PRAJAPATI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क़ के इस काम में नुक्सान है अब,
        
                                                    
                            
दिल लगाने का यहाँ तावान है अब।

आए थे हम तो वफ़ा की आस लेकर,
पर यहाँ तो हर कोई बेमान है अब।

लुट गए हम एक ही सौदे में 'साहब',
दर्द का दिल पर बड़ा एहसान है अब।

ख़्वाब की क़ीमत दी हमने आँसुओं से,
हर तमन्ना का यहाँ तो श्मशान है अब।

छोड़ दे नुक्सान का तू ज़िक्र 'दीपक ',
यह बचा जो पास तेरे मान है अब।
2 घंटे पहले
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