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ख्वाब की कीमत

                
                                                         
                            इश्क़ के इस काम में नुक्सान है अब,
                                                                 
                            
दिल लगाने का यहाँ तावान है अब।

आए थे हम तो वफ़ा की आस लेकर,
पर यहाँ तो हर कोई बेमान है अब।

लुट गए हम एक ही सौदे में 'साहब',
दर्द का दिल पर बड़ा एहसान है अब।

ख़्वाब की क़ीमत दी हमने आँसुओं से,
हर तमन्ना का यहाँ तो श्मशान है अब।

छोड़ दे नुक्सान का तू ज़िक्र 'दीपक ',
यह बचा जो पास तेरे मान है अब।
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एक घंटा पहले

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