विज्ञापन

मैं एक छोटी सी आशा हूं..

Deepa Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं एक छोटी सी आशा हूं जीवंतता की परिभाषा हूं।
        
                                                    
                            
जो हर नारी में पलती है अंतर मशाल सी जलती है,
लड़ती आंधी तूफानों से दीवानों से अनजानो से,
चट्टानों सी मजबूत बनी बाधाओं में भी रहे तनी,
डरती न जो अब शत्रु से भारत की गौरव गाथा हूं।

विश्वास नहीं जिसका डगमग रहती न है जो अब जड़वत,
जीती है जीने देती है मरती न पीड़ा सहती है,
इच्छाओं का न दमन करें चिंताओं का अब हवन करे,
तिरस्कृत न होगी अब नारी, नारी न रहेगी बेचारी,
गर्वित जो मां की कोख करे मैं ऐसी ज्ञान पिपासा हूं।

उसमें है जीवित क्षत्राणी दुर्गावती, झांसी की रानी,
इंदिरा, सरोजनी, विद्योतिमा,रानी पद्मावती और पन्ना,
जो वारेगी निज तन मन धन संस्कार धवल पावन चंदन,
भारत का मान बढ़े जिससे मैं बदली वह परिभाषा हूं।
-डाॅ दीपा 
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7573 कविताएं

View Profile