ये सत्ता करायेगी
एक दिन धर्मयुद्ध,
और मारे जाएंगे ये तमाम
धार्मिक आजीविकाएँ।
मंदिर, मस्जिद,
गिरजे और गुरुद्वारे
अपने-अपने अनुयायियों की गिनती करेंगे,
लाशों की नहीं।
अंत में न धर्म जीतेगा,
न मनुष्य बचेगा
जीतेगी केवल सत्ता।
और इतिहास के पन्नों पर
उस जीत का पूरा श्रेय
उन्हीं धार्मिक ठेकेदारों को दिया जाएगा,
जिन्होंने आस्था को हथियार
और इंसान को भीड़ बना दिया।