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किसान

Dakshal Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धरती के पुत्र है किसान
        
                                                    
                            
सभी के पालन हर है किसान

मिट्टी के से रक्षक है
ये अन्न के दाता है
राज करे ये धरती पर
काज करे ये धरती पर
खून पसीने से करते सिंचित
फसलों की हानी हो फिर भी नही किंचित
फर्क नहीं सैनिक और तुझ में
तूने पहरा दिया खेतो पर
उस ने दिया पहरा सीमाओं पर
है धरती पुत्र अब फर्क कहा
खेतो से प्यारा स्वर्ग कहा
नही जीना घर परिवार का पेट काट
खुशियों की तो फसल बाट
अब हालत बदल गए
राते अब निकल गई
खुशियों के बादल छाएं
खड़ी फ़सले अब दिल गाएं
नही चिंता पेसो की
अब सरकारे किसानों की
मत खड़े कर कंक्रीट के महल
मत कर इन स्वर्ग की भूमि पर ये खेल
सेवा से परे रख इस स्वार्थ को
मत छीन मां से फसलों को
हैं धरती पुत्र अब तू ही है
तारण हार
हैं धरती पुत्र अब तू ही है
पालन हार।

दक्षल कुमार व्यास

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