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सपनों का क्षितिज नापना अभी बाकी है।

Daksh Lohar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अभी अधूरे कुछ सपने बूनना बाकी है
        
                                                    
                            
जीवन में अभी तो बहुत सीखना बाकी है ।
पहले गहन निद्रा तोड़ जाग तो लू, चूंकि
सपनों का क्षितिज नापना अभी बाकी है।

कुसुमों में श्रेष्ठ कमलों का खिलना बाकी है
इस सतत् रजनी को भोर का मिलना बाकी है ।
कह दो तड़ाग को ना बिसरे कुसुमों को
चूंकि कमलों से जल सजाना अभी बाकी है।

धरातल की बेचैनी को मेघ मिलना बाकी है
बरखा तो आई है पर सावन का स्नेह बाकी है।
दो आवाज तिलमिलाते शुष्क खलिहानों को
चूंकि मेघों की गर्जना की धौंस अभी बाकी है।

सूक्ष्म दिवसों को वर्षों का प्रकाश बाकी है
हर सुरमई रात को चंद्र की ज्योति बाकी है
सराहो करुण बालपन के अबोधपन को
चूंकि तरूणाई का करिश्मा अभी बाकी है।

अंतर्मन की तृषा की तृप्ति अभी बाकी है
विफलता के कलह को शांति अभी बाक़ी है
उत्साहित करो अपने विह्वल मौन मन को
चूंकि, जीवन की ज्योत को अपनी प्रभा से आसमां चमकाना अभी बाकी है।
और, जीवन में बहुत कुछ करना अभी बाकी है।
एक महीने पहले
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