लगने लगी वो पहली मुलाकात में अच्छी ।
जैसे लगती है मुहब्बत हर बात में अच्छी ।
यूं तो उसकी हर एक तस्वीर मुकम्मल है ,
मगर वो लगती है मेरे साथ में अच्छी ।
उस चांद को पूर्णिमा की जरूरत ही नहीं,
वो लड़की लगती है हर एक रात में अच्छी ।
बड़ी मुहब्बत से लिखती है वो मेरा नाम ,
और लगने लगती है मेंहदी उसके हाथ में अच्छी ।
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