सुआ पढ़ावत आधी रतिया
मौजा सोवत मीठी निंदिया।
मीठी नींद सपन संसारा
सुआ पाठ सब भया असारा
दोनउ कान कपट दिए है
मौजा भूला नेहा बतिया
सुआ पढ़ावत आधी रतिया
मौजा सोवत मीठी निंदिया।
माया घर के भीतर पइठी
ठगिनी रूप धरे है बइठी
मौजा चकमक देखत खेला
नटिनी नाचत ओढ़ चुनरिया
सुआ पढ़ावत आधी रतिया
मौजा सोवत मीठी निंदिया।
पोथी सगरी पोटरी बान्ही
कोरा कागद मोटरी बान्ही
खोलत नहीं कलम दवाता
नाही बाँचत प्रेमा चिठिया
सुआ पढ़ावत आधी रतिया
मौजा सोवत मीठी निंदिया।
खोल पिंजर सुआ उड़ि जावे
मौजा कउनो सुधि नहीं आवे
तार पराना छेड़त नाही
भूला अब तो हिरदा पिरिया
सुबह पढ़ावत आधी रतिया
मौजा सोवत मीठी निंदिया।
~माधुरी महाकाश