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हमारा नव संवत्सर

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                            लिए हुए धन धान्य बहुत से
        
                                                    
                            
समृद्धि के प्रतिमान बहुत से
नव वर्ष हमारा आता है
नवदुर्गा के नव रूपों सँग
नव संवत्सर हो जाता है।

मधुमास स्वयं अगवानी में
ले मधुकलश लता मुस्काती
आँचल हरा बिछा चहुँओर
धरा स्वयं स्वागत को आती
अमराई के प्रति गुच्छों पर
रस का यौवन मुस्काता है।

नवदुर्गा के नव रूपों सँग
नव संवत्सर हो जाता है।

सौगंध सभी पूरी होगी
अब चैत महीना आया है
खुशहाली के नवरंग लिए
आशाएं भर कर लाया है
सुवर्ण बालियों का उपहार
हलधर ज्योनार चढ़ाता है।

नवदुर्गा के नव रूपों सँग
नव संवत्सर हो जाता है।

राग रागिनी डेरा डाले
खग कलरव, मधु गुंजन में हैं
झूम रही फूलों की डाली
वंशी बजती कुंजन में है
भारत पुण्य धरा यह अपनी
ब्रह्म राम बनकर आता है।

नव दुर्गा के नव रूपों सँग
नव संवत्सर हो जाता है।
- माधुरी महाकाश
एक वर्ष पहले
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