विज्ञापन

भारत माता

Chess and

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सदियाँ जिसके गुण गाती हैं
        
                                                    
                            
सुख भोग सभी की दाता है
आशीष दे रही हम सबको
वह मेरी भारत माता है ।

पूरब से पश्चिम तक देखो
लहराता है माँ का आँचल
लिए हुई विजयी ध्वज को
शौर्य कथाएँ कहती पल-पल ।

मीठी सी अगणित धाराएँ
गंगा जमुना बन बहती हैं
भगवान जहाँ बालक बन घूमे
यह धरा बहुत कुछ कहती है।

शीश सुशोभित अडिग हिमालय
वंदन करती सभी दिशाएँ
सागर धोता है चरणों को
नील गगन है शीश झुकाए।

बलिदानों की सभी कथाएँ
भारत माता हमें सुनाती
अपने वीर सपूतों को माँ
आँचल में रखकर दुलराती।

देखो सुंदर प्यारा आँचल
कभी मलिन ना होने पाए
भारत माता की रक्षा कर
वीर अमर हम भी कहलाएँ।
-माधुरी महाकाश
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12437 कविताएं

View Profile