सदियाँ जिसके गुण गाती हैं
सुख भोग सभी की दाता है
आशीष दे रही हम सबको
वह मेरी भारत माता है ।
पूरब से पश्चिम तक देखो
लहराता है माँ का आँचल
लिए हुई विजयी ध्वज को
शौर्य कथाएँ कहती पल-पल ।
मीठी सी अगणित धाराएँ
गंगा जमुना बन बहती हैं
भगवान जहाँ बालक बन घूमे
यह धरा बहुत कुछ कहती है।
शीश सुशोभित अडिग हिमालय
वंदन करती सभी दिशाएँ
सागर धोता है चरणों को
नील गगन है शीश झुकाए।
बलिदानों की सभी कथाएँ
भारत माता हमें सुनाती
अपने वीर सपूतों को माँ
आँचल में रखकर दुलराती।
देखो सुंदर प्यारा आँचल
कभी मलिन ना होने पाए
भारत माता की रक्षा कर
वीर अमर हम भी कहलाएँ।
-माधुरी महाकाश