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स्मृति

Chandra Makanday

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन के भावों की उत्पत्ति स्मृति पटल पर अंकित हो जाती है,
        
                                                    
                            
शब्द लेखनी जैसे नित नवीन सृजन पटल पर कर जाती है।

है अति विशाल समुद्र मन के भावों में अक्सर लहराता है,
उसकी लहरों का प्रतिबिम्ब अक्सर मन पर अंकित हो जाता है।।

सुख दुःख हानि लाभ के अंश यादों का घरोंदा बन जाते,
आगे चलकर जीवन के पहलू स्मृति पटल पर अंकित हो जाते।

इन यादों के झूले में तो जीवन अक्सर झूला करता है,
कुछ खट्टे मीठे पलों को मस्तिष्क में रंग अक्सर भरता है।।

जब ठोकर पर ठोकर जीवन में अक्सर खानी पड़ती है,
कभी कभी यह दुनिया जीवन में बेगानी सी लगती है।

जब अपनेपन में भी जहर नफरत का अक्सर भर जाता है,
अपने पराये का भेद अक्सर जीवन में पता चल जाता है।।

कितना कुछ देखा हमने कितना दुनिया को समझा है,
वह सब कुछ अक्सर जीवन के स्मृति पटल पर अंकित होता है।

इन्हीं यादों की छांव तले तो जीवन बढ़ता अक्सर जाता है,
कुछ नयी कुछ पुरानी यादों का कारवां बनता चला जाता है।।

यही स्मृति तो अनुभव की एक गठरी सी बनती जाती हैं,
स्मृति पटल के किसी कोने से पुरानी याद निकल आती हैं।

आने वाली को हम वो अनुभव तोहफे में अक्सर दे जाते हैं,
अपने स्मृति पटल पर हम उन्हीं यादों को समेटे चले जाते हैं।।

 
9 घंटे पहले
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